शाहजी की बन्दी और युद्धविराम CHHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ


 Capture of Shahaji and ceasefire
The Sultan of Bijapur was in the same quibble before Shivaji Maharaj's antics. He ordered the father of Shivaji Maharaj to be arrested. Shahaji Raje was in Karnataka at that time and a captive assistant was taken captive by Baji Ghorpad and brought to Bijapur . They were also accused that they tried to get the service of the Qutb Shah who was the ruler of Golconda and because of this Adilshah's enemy. After the mediators of Bijapur's two warlords, Shahaji Maharaj was freed on the condition that he would restrain Shivaji Maharaj. For the next four years Shivaji Maharaj did not attack Bijipur. During this time, he organized his army.

शाहजी की बन्दी और युद्धविराम
बीजापुर का सुल्तान शिवाजी महाराज की हरकतों से पहले ही आक्रोश में था। उसने शिवाजी महाराज के पिता को बन्दी बनाने का आदेश दे दिया। शाहजी राजे उस समय कर्नाटक में थे और एक विश्वासघाती सहायक बाजी घोरपड़े द्वारा बन्दी बनाकर बीजापुर लाए गए। उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने कुतुबशाह की सेवा प्राप्त करने की कोशिश की थी जो गोलकोंडा का शासक था और इस कारण आदिलशाह का शत्रु। बीजापुर के दो सरदारों की मध्यस्थता के बाद शाहाजी महाराज को इस शर्त पर मुक्त किया गया कि वे शिवाजी महाराज पर लगाम कसेंगे। अगले चार वर्षों तक शिवाजी महाराज ने बीजीपुर के ख़िलाफ कोई आक्रमण नहीं किया। इस दौरान उन्होंने अपनी सेना संगठित की।

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