प्रभुता का विस्तार CHHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ


CHHATRAPATI SHIVAJI MAHARAJ,






Expansion of sovereignty 
Statue of Shivaji Maharaj in Birla Temple, Delhi
According to the conditions of the emancipation of Shahaji, Shivaji Raje did not attack the areas of Bijapur but he tried to increase its power in south-west. But Javali 's state was working as a barrier in this order . This state was situated in the far north-west of Satara between the Vamasand Krishna rivers. Raja Chandra More MoreWho had received this manor from Shivaji. Shivaji asked Moray ruler Chandra Rao to join Swaraj, but Chandra Rao got along with Sultan of Bijapur. In 1656 Shivaji took his army and attacked Jawla. Chandrao Moray and his two sons fought with Shivaji, but in the end they were taken captive but Chandra Rao ran away. The locals opposed Shivaji's action, but they succeeded in crushing the rebellion. From this, Shivaji got the property of the eight tribes collected in that fort. Apart from this, many Mawal soldiers, Murarbaji Deshpande also joined Shivaji's army.

प्रभुता का विस्तार
बिरला मंदिर, दिल्लीमें शिवाजी महाराज की मूर्ति
शाहजी की मुक्ति की शर्तों के मुताबिक शिवाजी राजाने बीजापुर के क्षेत्रों पर आक्रमण तो नहीं किया पर उन्होंने दक्षिण-पश्चिम में अपनी शक्ति बढ़ाने की चेष्टा की। पर इस क्रम में जावली का राज्य बाधा का काम कर रहा था। यह राज्य सातारा के सुदूर उत्तर पश्चिम में वामा और कृष्णा नदी के बीच में स्थित था। यहाँ का राजा चन्द्रराव मोरे था जिसने ये जागीर शिवाजी से प्राप्त की थी। शिवाजी ने मोरे शासक चन्द्रराव को स्वराज में शमिल होने को कहा पर चन्द्रराव बीजापुर के सुल्तान के साथ मिल गया। सन् १६५६ में शिवाजी ने अपनी सेना लेकर जावली पर आक्रमण कर दिया। चन्द्रराव मोरे और उसके दोनों पुत्रों ने शिवाजी के साथ लड़ाई की पर अन्त में वे बन्दी बना लिए गए पर चन्द्रराव भाग गया। स्थानीय लोगों ने शिवाजी के इस कृत्य का विरोध किया पर वे विद्रोह को कुचलने में सफल रहे। इससे शिवाजी को उस दुर्ग में संग्रहित आठ वंशों की सम्पत्ति मिल गई। इसके अलावा कई मावल सैनिक मुरारबाजी देशपांडे भी शिवाजी की सेना में सम्मिलित हो गए।

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